दोस्त की सही परख
एक बार की बात है , एक बकरी थी वो बहुत ख़ुशी से अपने गाँव में रहती थी । वो बहुत अच्छी थी बहुत सारी बकरियाँ उसकी सहेली थी । उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी वो सभी से बात करती और सभी को अपना दोस्त बना लेती थी ।
सभी कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन एक बार वो बकरी बीमार पड़ी । और इस कारण वह धीरे -धीरे कमजोर होने लगी । इसलिए अब वो पूरा -पुरा दिन घर पर ही बिताने लगी । बकरी ने जो खाना पहले से अपने लिए जमा करके रखा था , अब वो भी खत्म होते जा रहा था ।
एक दिन उसकी कुछ बकरी सहेलियाँ उसका हल - चाल पूछने उसके पास आई , तब ये बकरी बड़ी खुश हुई । इसने सोचा की अपनी सहेलियों से कुछ और दिनों के लिए वह खाना मंगवा लेगी । लेकिन वे बकरियाँ तो उससे मिलने के लिए अन्दर आने से पहले ही उसके घर के बाहर रुक गई और उसके आँगन में रखा उसका खाना घास -फूस खाने लगी । ये देखकर अब इस बकरी को बहुत बुरा लगा और समझ में आ गया कि उसने अपने जीवन में क्या गलती की ? अब वो सोचने लगी कि काश ! हर किसी को अपने जीवन का हिस्सा व् दोस्त बनाने से पहले उसने थोड़ा परख लिया होता तो अब इस बीमारी में उसकी मदद के लिए कोई तो होता ।
सच्चा दोस्त वही होता है जो उसके सुख और दुःख में हाथ बटाये ।
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