जीवन का अनमोल वाणी
प्रेम को पाना
जब भी प्रेम की बात आती है । हम सबसे पहले अपने मन में एक नायक और एक नायिका का चित्रण कर लेते है , क्यों ? आपके साथ भी यही होता है न , पर क्या प्रेम केवल नायक नायिका के आकर्षण का बंधन है ? नहीं !
प्रेम तो परिवार से होता है , या हो सकता है ,माता -पिता , भाई -बहन से हो सकता है , सखा -मित्रो से हो सकता है ,मानवता के लिए हो सकता है , देश और जन्भूमि के लिए हो सकता है ,किसी कला के लिए हो सकता है , इस प्रकृति के लिए हो सकता है , पर प्रेम कभी उस पन्ने पर लिखा ही नहीं जा सकता , जिस पर पहले ही बहुत कुछ लिखा हो , जैसे -एक भरी मट्टकी में और पानी आ ही नहीं सकता ।
यदि प्रेम को पाना है तो मन को खली करना होगा । अपनी इच्छाए ,अपना सुख सब त्याग कर समर्पण करना होगा अपने मन से व्यापर हट दो तभी प्रेम मिलेगा और मन हमेशा प्रसन्न और आनन्दित रहेगा।
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